आचार्य श्री समयसागर जी: "पुरुषार्थ के बिना मोक्ष असंभव"
जीव की असीम शक्तियाँ और पुरुषार्थ
आचार्य श्री ने स्पष्ट किया कि केवली भगवान जीव की शक्तियों (अनंत ज्ञान, दर्शन, सुख और वीर्य) को तो देखते हैं, लेकिन पुरुषार्थ करना जीव के अपने हाथ में है। जीव अपने पुरुषार्थ से ही चारों गतियों (देव, मनुष्य, तिर्यंच और नरक) में भ्रमण करता है और यदि चाहे, तो इसी पुरुषार्थ से मोक्ष मार्ग पर अग्रसर हो सकता है।
कुम्हार, मिट्टी और मटके का उदाहरण: कार्य सिद्धि के लिए पुरुषार्थ अनिवार्य है।
निमित्त और उपादान का संतुलन
आचार्य श्री ने एक व्यावहारिक उदाहरण दिया कि जैसे घड़ा बनने के लिए मिट्टी (उपादान) और कुम्हार (निमित्त) के साथ-साथ चाक चलाने का पुरुषार्थ आवश्यक है, वैसे ही धर्म सभा में प्रवचन संपन्न होने के लिए भी मुनिराज का पुरुषार्थ आवश्यक होता है। केवल बैठने से कार्य सिद्ध नहीं होते।
सूर्योदय धाम और सामाजिक उत्तरदायित्व
आचार्य श्री ने परम पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज द्वारा नामकरण किए गए ‘सूर्योदय धाम’ मंदिर का उल्लेख किया। उन्होंने समाज को प्रेरित किया कि यह भव्य निर्माण तभी पूर्ण होगा जब सभी श्रद्धालु मिलकर प्रयास करेंगे। यह संदेश आध्यात्मिक उन्नति के साथ-साथ सामूहिक उत्तरदायित्व का भी बोध कराता है।
विशेष घोषणा: पातालकोट एक्सप्रेस
इस गरिमामय अवसर पर छिंदवाड़ा के सांसद श्री बंटी विवेक साहू उपस्थित रहे। उन्होंने आचार्य श्री से आशीर्वाद लिया और घोषणा की कि पातालकोट एक्सप्रेस का सोनागिर क्षेत्र में स्टॉपेज दिया जाएगा। यह कदम सोनागिर (सिद्धक्षेत्र) जाने वाले यात्रियों के लिए बहुत बड़ी राहत सिद्ध होगा।