१. पर्वों के प्रकार: अनादि और सादि

जैन शासन में पर्वों को दो श्रेणियों में बांटा गया है:

  1. अनादि पर्व: जो पर्व किसी व्यक्ति द्वारा शुरू नहीं किए गए, बल्कि अनादिकाल से चले आ रहे हैं और अनंतकाल तक चलते रहेंगे। (उदाहरण: सोलहकारण, दशलक्षण, अष्टान्हिका)।

  2. सादि पर्व: जो पर्व किसी महापुरुष की स्मृति या ऐतिहासिक घटना के कारण प्रारंभ हुए हैं। (जैसे: महावीर जयंती, दीपावली)।

२. दशलक्षण पर्व का समय (वर्ष में तीन बार)

दशलक्षण पर्व एक अनादि-निधन पर्व है। यह वर्ष में तीन बार मनाया जाता है:

  1. भाद्रपद (भादों) मास

  2. माघ मास

  3. चैत्र मास

३. दशलक्षण धर्म (१० धर्मों के नाम)

इस पर्व के दौरान जिन १० धर्मों की आराधना की जाती है, वे आत्मा के स्वभाव हैं:

  1. उत्तम क्षमा (Forgiveness)

  2. उत्तम मार्दव (Humility/Tenderness)

  3. उत्तम आर्जव (Straightforwardness/Honesty)

  4. उत्तम सत्य (Truthfulness)

  5. उत्तम शौच (Purity/Contentment)

  6. उत्तम संयम (Self-Restraint)

  7. उत्तम तप (Penance)

  8. उत्तम त्याग (Renunciation)

  9. उत्तम आकिंचन्य (Non-attachment)

  10. उत्तम ब्रह्मचर्य (Chastity/Celibacy)

४. धार्मिक क्रियाएं और तत्त्वार्थसूत्र वाचन

नोट: आर्यिका चंदनामती माताजी द्वारा रचित 'अमूल्य प्रवचन' श्रेणी में तत्त्वार्थसूत्र के दसों अध्यायों के सुंदर प्रवचन उपलब्ध हैं, जिनका लाभ लिया जा सकता है।


Key Points in English

Here are the essential highlights regarding Daslakshan Parva: