१. मंगल आचरण
णमो अरिहंताणं, णमो सिद्धाणं, णमो आइरियाणं। णमो उवज्झायाणं, णमो लोए सव्वसाहूणं।।
२. जैन धर्म: एक शाश्वत प्राकृतिक सत्ता
धर्म की शाश्वत सत्ता प्राकृतिक सृष्टि व्यवस्था के अनुसार मानी गई है।
अनादि-निधन: जैन धर्म का कोई संस्थापक नहीं है। यह एक प्राकृतिक धर्म है जिसका न आदि (आरंभ) है और न अंत, इसीलिए इसे 'अनादि-निधन' कहा जाता है।
वैदिक प्रमाण: वैदिक पुराणों और वेदों में भी जैन धर्म को वेदों से पूर्व का स्वीकार किया गया है और वहाँ इसे "निग्रन्थ धर्म" के नाम से संबोधित किया गया है।
३. 'जिन' और 'जैन' की परिभाषा
जैन धर्म की व्याख्या समझने के लिए इन दो शब्दों को समझना आवश्यक है:
जिन (Jin): "कर्मारातीन् जयतीति जिनः" — अर्थात् जो कर्म रूपी शत्रुओं को जीत लेते हैं, वे 'जिन' कहलाते हैं।
जैन (Jain): "जिनोदेवता यस्यासौ जैनः" — अर्थात् जो उन 'जिन' (राग-द्वेष विजेताओं) को अपना देवता मानते हैं, वे 'जैन' कहे जाते हैं।
यह धर्म किसी संप्रदाय विशेष का नहीं, बल्कि प्राणिमात्र का धर्म है।
४. वर्तमान अवसर्पिणी काल के २४ तीर्थंकर
यद्यपि अनंत कालों में अनंत तीर्थंकर हुए हैं, परन्तु वर्तमान कर्मयुग (अवसर्पिणी काल) में २४ तीर्थंकर हुए हैं, जिनके नाम इस प्रकार हैं:
ऋषभनाथ (आदिनाथ)
अजितनाथ
संभवनाथ
अभिनंदननाथ
सुमतिनाथ
पद्मप्रभ
सुपार्श्वनाथ
चन्द्रप्रभु
पुष्पदन्तनाथ (सुविधिनाथ)
शीतलनाथ
श्रेयांसनाथ
वासुपूज्यनाथ
विमलनाथ
अनंतनाथ
धर्मनाथ
शांतिनाथ
कुंथुनाथ
अरहनाथ
मल्लिनाथ
मुनिसुव्रतनाथ
नमिनाथ
नेमिनाथ
पार्श्वनाथ
महावीर स्वामी
५. प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव का योगदान
इन चौबीस तीर्थंकरों में प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव ने आज से असंख्यात वर्ष पूर्व (एक कोड़ाकोड़ी सागर वर्ष पूर्व) अयोध्या नगरी में जन्म लिया था। उन्होंने ही समाज व्यवस्था के लिए प्रजा को जीवन जीने की ६ मुख्य कलाएं (षट्कर्म) सिखाई थीं:
असि (Asi): शस्त्र विद्या / सुरक्षा।
मसि (Masi): लेखन / लिपि।
कृषि (Krishi): खेती।
विद्या (Vidya): ज्ञान/शिक्षा।
वाणिज्य (Vanijya): व्यापार।
शिल्प (Shilp): कला और कारीगरी।
Key Points in English
Here are the essential highlights regarding the eternal nature of Jainism and the Tirthankaras:
Eternal Nature: Jainism is a natural, eternal religion (Anaadinidhan) with no founder. It is referred to as "Nirgranth Dharma" in Vedic texts.
Meaning of 'Jin': "One who conquers Karma" is called a Jin. A follower of Jin is a Jain.
The 24 Tirthankaras: The current cosmic cycle has seen 24 Tirthankaras, starting from Lord Rishabhdev to Lord Mahavir.
Lord Rishabhdev (First Tirthankara): Born in Ayodhya countless years ago. He is the father of human civilization who taught the six life skills: Asi (Swordsmanship), Masi (Writing), Krishi (Agriculture), Vidya (Knowledge), Vanijya (Trade), and Shilp (Crafts).