Revolutionary Literature

Kadve Pravachan

कड़वे प्रवचन: विचार जो जीवन बदल दें

The iconic collection of discourses by Muni Tarun Sagar Ji. Bitter like medicine, but essential for curing the diseases of society, corruption, and hypocrisy.

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World's Largest Book Kadve Pravachan

A World Record Achievement

The Magnitude of Truth

The thoughts of Muni Tarun Sagar Ji are not just impactful in meaning but in physical manifestation as well. [cite_start]The "Kadve Pravachan" book holds the distinction of being one of the world's largest books[cite: 62].

  • Author: Krantikari Rashtrasant Muni Tarun Sagar Ji
  • Content: Blunt, satirical, and reformist discourses.
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  • Reach: Published in 6 languages and broadcast to 122 countries[cite: 217, 376].

Selected Bitter Discourses

Pearls of wisdom from the revolutionary saint.

1
"लक्ष्मी पुण्याई से मिलती है। मेहनत से मिलती हो तो मजदूरों के पास क्यों नहीं? बुद्धि से मिलती हो तो पंडितों के पास क्यों नहीं? ज़िन्दगी में अच्छी संतान, सम्पत्ति और सफलता पुण्य मिलती है। अगर आप चाहते हैं कि आपका इहलोक और परलोक सुखमय रहे तो पूरे दिन में कम से कम दो पुण्य जरूर करिये। क्योकि ज़िन्दगी में सुख, सम्पति और सफलता पुण्याई से मिलती हैं।"
2
"संसार में उल्झन और परेशानी न आये - यह कैसे हो सकता हैं। सप्ताह में एक दिन रविवार का भी तो आएगा ना। प्रकृति का नियम ही ऐसा है की ज़िन्दगी में जितना सुख-दुःख मिलना है, वह मिलता ही है। मिलेगा भी क्यों नहीं, टेंडर में जो भरोगे वही तो खुलेगा। मीठे के साथ नमकीन जरूरी है तो सुख के साथ दुःख का होना भी लाजमी है। दुःख बढे कम की चीज है। ज़िन्दगी में अगर दुःख न हो तो कोई प्रभु को याद ही न करे।"
3
"दुनिया में रहते हुए दो चीजों को कभी नहीं भूलना चाहिए। न भूलने वाली चीज एक तो परमात्मा तथा दूसरी अपनी मौत। भूलने वाली दो बातों में एक है - तुमने किसी का भला किया तो उसे तुरंत भूल जाओ। और दूसरी किसी ने तुम्हारे साथ अगर कभी कुछ बुरा भी कर दिया तो उसे तुरंत भूल जाओ। बस, दुनिया में ये दो बातें याद रखने और भूल जाने जैसी है।"
4
"जैनियों के पास महावीर स्वामी का बढ़िया माल लेकिन पेकिंग घटिया है जबकि जमाना पेकिंग का है। जैन समाज या तो अपने मंदिरों के दरवाजे जन-जन के खोले या फिर महावीर को मंदिरों की दीवारों से निकालकर आम आदमी तक लाए, चौराहे तक लाए। चौराहे पर लाने से मेरा यह कहना कतई नहीं है की में मर्यादाओं से खेल रहा हु। मेरा तात्पर्य भगवान महावीर और उनके सन्देश को जन-जन के बीच ले जाने का है।"
5
"मनुष्य जाती में दो पुरानी बुराईया है। एक ताने मारने और दूसरी आंख मारने की। पुरुष अगर ताने मारना और महिलाएं आंख मारना बंद कर दे तो जीवन और समाज के आधे संघर्ष ख़त्म हो जाये। अस्त्र - शस्त्र से अब तक जितने लोग नहीं मरे होंगे उससे भी अधिक लोग ताने और आंख मारने से मर चुके है। बस, अपनी आंखों और जुबान को संभाल लो, सब कुछ संभल जायेगा। आंख और जुबान बड़ी नालायक है।"
6
"मरने वाला मर कर स्वर्ग गया है या नर्क? अगर कोई यह जानना चाहता है तो इसके लिए किसी संत या ज्योतिषी से मिलने की जरूरत नहीं है, बल्कि उसकी शवयात्रा में होने वाली बातो को गौर से सुनने की जरूरत है। यदि लोग कह रहे हो कि बहुत अच्छा आदमी था। अभी तो उसकी देश व समाज को बड़ी जरूरत थी, जल्दी चल बसा तो समझना कि व स्वर्ग गया है। और यदि लोग कह रहे हो कि अच्छा हुआ धरती का एक पाप तो कम हुआ तो समझना कि मरने वाला नर्क गया है।"
7
"सूर्योदयके साथ ही बिस्तर छोड़ देना चाहिए, ऐसा न करने से सिर पर पाप चढ़ता है। महिलाये जो की घर की लक्ष्मी है, इन लक्ष्मियों को सूर्योदय के साथ ही उठ जाना चाहिए। लक्ष्मी थोड़ी देर में उठे तो एक बार चल जायेगा, पर लक्ष्मी की देर से उठना बिलकुल नहीं चलेगा। जिन घर - परिवारों में लक्ष्मी के साथ लक्ष्मी भी देर सुबह तक सोई पड़ी रहती है उन घरो की 'असली - लक्ष्मी' रूठ जाया करती है। और घर छोड़कर चली जाया करती है।"
8
"आज जैन समाज के सामने अपने को शाकाहारी बनाये रखने की सबसे बड़ी चुनौती है। महावीर के मोक्ष के बाद इन 2600 वर्षो में जैन समाज कई बार बटा है। मगर अब जो बटवारा होगा वह दिगम्बर जैन - श्वेताम्बर जैन , तेरापंथी जैन - बीसपंथी जैन , स्थानकवासी जैन और मंदिरमार्गी जैन जैसे नाम से नहीं होंगा बल्कि 'शाकाहारी- जैन 'और ' मांशाहारी - जैन ' के नाम से होंगा। अगर ऐसा हुआ तो याद रखना महावीर हमें कभी क्षमा नहीं करेंगे।"
9
"मां - बाप की आँखों में दो बार ही आंसू आते है। एक तो लड़की घर छोड़ते तब और दूसरा लड़का मुह मोड़ते तब। पत्नी पसंद से मिल सकती है। मगर मां तो पुण्य से ही मिलती है। इसलिए पसंद से मिलने वाली के लिए पुण्य से मिलने वाली को मत ठुकरा देना। जब तू छोटा था तो मां की शय्या गीली रखता था, अब बढ़ा हुआ तो मां की आंख गीली रखता है। तू कैसा बेटा है ? तूने जब धरती पर पहला सांस लिया तब तेरे मां - बाप तेरे पास थे। अब तेरा फ़र्ज़ है की माता - पिता जब अंतिम सांस ले तब तू उनके पास रहे।"
10
"दान देना उधार देने के समान है। देना सीखो कृपणो की जो देता है वह देवता है और जो रखता है वह राक्षस। ज्यानी तो इशारे से ही देने को तैयार हो जाता है मगर नीच लोग गन्ने की तरह कूटने- पीटने के बाद ही देने को राजी होते है। जब तुम्हारे मन में देने का भाव जागे तो समझना पुण्य का समय आया है। अपने होश - हवास में कुछ दान दे डालो क्योकि जो दे दिया जाता वह सोना हो जाता है और जो बचा लिया जाता है वह मिटटी हो जाता है। भिखारी भी भीख में मिली हुई रोटी तभी खाए जब उसका एक टुकड़ा कीड़े - मकोड़े को डाल दे। अगर वह ऐसा नहीं करता तो सात जन्मो तक भिखारी ही रहेगा।"
11
"पैसा कमाने के लिए कलेजा चाहिए। मगर दान करने के लिए उससे भी बढ़ा कलेजा चाहिए। दुनिया कहती है की पैसा तो हाथ का मेल है। में पैसे को ऐसी गाली कभी नहीं दूंगा। जीवन और जगत में पैसे का अपना मूल्य है, जिसे झुठलाया नहीं जा सकता। यह भी सही है की जीवन में पैसा कुछ हो सकता है, कुछ -कुछ भी हो सकता है, और बहुत -कुछ भी हो सकता है मगर 'सब-कुछ'कभी नहीं हो सकता। और जो लोग पैसे को ही सब कुछ मान लेते है वे पैसे के खातिर अपनी आत्मा को बेचने के लिए भी तैयार हो जाते है।"

Bring the Wisdom Home

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