१. भाषा और परिचय
णमोकार मंत्र मूल रूप से प्राकृत भाषा का मंत्र है।
संस्कृत में: इसे 'नमस्कार मंत्र' कहा जाता है।
हिंदी में: अपभ्रंश रूप में इसे 'नवकार मंत्र' के नाम से जाना जाता है।
इस मंत्र के अनेक नाम हैं जो इसकी शक्ति और स्वभाव को दर्शाते हैं। इसके प्रमुख नाम और उनका विवरण निम्न प्रकार है:
२. पंच नमस्कार मंत्र
इस मंत्र में किसी एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि उन पाँच परम पवित्र आत्माओं को नमन किया गया है जो या तो परम पद (मोक्ष) प्राप्त कर चुके हैं या उस मार्ग पर अग्रसर हैं।
अर्थ: पाँच परमेष्ठियों (अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय, साधु) को नमस्कार करने के कारण इसे 'पंच नमस्कार मंत्र' कहते हैं।
३. महामंत्र और अपराजित मंत्र
तीनों लोकों में इस मंत्र के समान प्रभावशाली कोई दूसरा मंत्र नहीं है, इसलिए इसे 'अपराजित' (जिसे कोई हरा न सके) कहा जाता है।
आचार्य उमास्वामी का कथन: उन्होंने इसकी महिमा बताते हुए कहा है कि यदि तराजू के एक पलड़े में 'णमोकार मंत्र' और दूसरे में 'तीन लोक' रख दिए जाएं, तो भी णमोकार मंत्र का पलड़ा ही भारी रहेगा।
४. मूलमंत्र और मंत्रराज
यह मंत्र संसार के सभी मंत्रों का जनक (पिता) है। जैन आगमों के अनुसार, इसी एक मंत्र से लाखों-करोड़ों मंत्रों की उत्पत्ति हुई है।
उपाधि: सभी मंत्रों का मूल (जड़) और राजा होने के कारण इसे 'मूलमंत्र' या 'मंत्रराज' कहा जाता है।
५. अनादि-निधन (शाश्वत) मंत्र
पाँचों परमेष्ठी अनंत काल से होते आ रहे हैं और भविष्य में भी अनंत काल तक होते रहेंगे।
शाश्वतता: इस मंत्र का न तो कोई आदि (आरंभ) है और न ही कोई अंत। इसे किसी ने बनाया नहीं है और न ही यह कभी नष्ट होगा।
लिपिबद्ध: वर्तमान काल की अपेक्षा से, आचार्य भूतबली और आचार्य पुष्पदंत ने जैन धर्म के महान ग्रंथ 'षट्खण्डागम' में इसे सर्वप्रथम प्राकृत भाषा में लिपिबद्ध किया था।
६. मंगल मंत्र
यह मंत्र सभी पापों का नाश करने वाला और जीवन में शुभता (मंगल) लाने वाला है, इसलिए इसे 'मंगल मंत्र' भी कहते हैं।
Key Points in English
Here are the essential highlights regarding the names of Namokar Mantra:
Original Language: Prakrit (Known as Namaskar in Sanskrit, Navkar in Hindi).
Panch Namaskar Mantra: Called so because it offers salutations to the 5 Supreme Beings (Panch Parmeshthis).
Aparajit Mantra (Undefeated): Acharya Umaswami stated it is weightier and more powerful than the entire three worlds combined.
Moolmantra (Root Mantra): It is considered the root origin of millions of other mantras.
Anaadinidhan (Eternal): It has no beginning and no end. While it is eternal, it was first scripturally recorded by Acharya Bhutbali and Pushpadant in the Shatkhandagam.